नोएडा जीएसटी जोन ने जून में बनाया नया रिकॉर्ड, 31% बढ़कर ₹1,235 करोड़ पहुंचा जीएसटी कलेक्शन
नोएडा जीएसटी जोन ने जून 2026 में ₹1,235 करोड़ का जीएसटी संग्रह दर्ज किया, जो पिछले साल की तुलना में 31% अधिक है। नए उद्योगों, निवेश और सख्त निगरानी के चलते राजस्व में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।

- नोएडा जीएसटी जोन ने जून 2026 में ₹1,235 करोड़ संग्रह कर नया रिकॉर्ड बनाया, जो पिछले वर्ष से 31% अधिक है।
- जून 2025 के ₹937 करोड़ की तुलना में इस बार ₹298 करोड़ की अतिरिक्त राजस्व वृद्धि दर्ज की गई।
- प्रदेश स्तर पर 12% औसत वृद्धि के मुकाबले नोएडा जोन ने 31% बढ़त के साथ उत्तर प्रदेश में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया।
- नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और नए उद्योगों से व्यापारिक गतिविधियों को बड़ा बढ़ावा मिला।
ग्रेटर नोएडा: राज्य कर विभाग के नोएडा जीएसटी जोन ने जून 2026 में जीएसटी संग्रह के मामले में नया रिकॉर्ड बनाया है। विभाग के अनुसार, जून महीने में जोन ने ₹1,235 करोड़ का जीएसटी संग्रह किया, जो पिछले वर्ष जून 2025 के ₹937 करोड़ की तुलना में 31 प्रतिशत अधिक है। इस दौरान राजस्व में ₹298 करोड़ की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
वित्तीय वर्ष 2026-27 की शुरुआत से ही नोएडा जोन का प्रदर्शन लगातार बेहतर रहा है। अप्रैल 2026 में ₹1,442.18 करोड़ और मई 2026 में ₹1,113.37 करोड़ का जीएसटी संग्रह हुआ था। जून के आंकड़ों ने इस सकारात्मक रुझान को और मजबूत किया है।
राज्य कर विभाग के अपर आयुक्त संदीप भागिया ने बताया कि जिले में औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों में तेजी आने से राजस्व संग्रह में लगातार वृद्धि हो रही है। साथ ही, जीएसटी चोरी रोकने के लिए विभाग द्वारा जांच और निगरानी अभियान भी तेज किए गए हैं, जिससे कर संग्रह में सुधार देखने को मिला है।
निवेश और नए उद्योगों का मिला फायदा गौतमबुद्ध नगर में नए उद्योगों की स्थापना, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास बढ़ते निवेश और वेस्टर्न एवं ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) से व्यापारिक गतिविधियों को गति मिली है। इसके अलावा संपत्ति पंजीकरण, आबकारी और अन्य आर्थिक क्षेत्रों से भी राजस्व में वृद्धि दर्ज की गई है।
विभाग के अनुसार, प्रदेश स्तर पर जून 2026 में जीएसटी संग्रह में औसतन 12 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि नोएडा जीएसटी जोन ने 31 प्रतिशत की वृद्धि के साथ उत्तर प्रदेश में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले महीनों में निवेश और औद्योगिक विस्तार के चलते राजस्व संग्रह में और बढ़ोतरी की संभावना है।
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