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नोएडा की इन सोसायटियों में गंदे पानी का संकट, एसटीपी बंद मिलने पर बिल्डरों को नोटिस

सेक्टर-150 की चार सोसायटियों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं मिले चालू, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मांगा जवाब

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नोएडा की इन सोसायटियों में गंदे पानी का संकट, एसटीपी बंद मिलने पर बिल्डरों को नोटिस
AI Key Highlights
  • नोएडा सेक्टर-150 की चार हाउसिंग सोसायटियों में जांच के दौरान सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बंद पाए गए।
  • यूपीपीसीबी ने पानी के नमूने फेल होने और एसटीपी बंद मिलने पर संबंधित बिल्डरों को नोटिस जारी किया।
  • एक महीने से अधिक समय बाद भी बिल्डरों द्वारा संतोषजनक जवाब न मिलने पर दोबारा नोटिस भेजा गया।
  • निर्धारित समय में जवाब नहीं मिला तो बिल्डरों के खिलाफ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड आगे की कार्रवाई करेगा।

नोएडा के सेक्टर-150 में रहने वाले लोगों की पानी से जुड़ी शिकायतों ने अब प्रशासन का ध्यान खींच लिया है। जांच के दौरान चार हाउसिंग सोसायटियों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बंद पाए गए हैं, जिसके बाद उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) ने संबंधित बिल्डरों को नोटिस जारी किया है।

मामला तब सामने आया जब निवासियों ने गंदे पानी और जल गुणवत्ता को लेकर लगातार शिकायतें दर्ज कराईं। शिकायतों के आधार पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया और पानी के नमूने जांच के लिए भेजे।

जांच में क्या मिला?

अधिकारियों के मुताबिक, जिन सोसायटियों की जांच की गई वहां एसटीपी या तो पूरी तरह बंद थे या फिर निर्धारित मानकों के अनुसार काम नहीं कर रहे थे। पानी के सैंपल भी टेस्ट में फेल पाए गए, जिससे साफ हुआ कि सीवेज ट्रीटमेंट की प्रक्रिया सही तरीके से नहीं हो रही थी।

विशेषज्ञों का कहना है कि एसटीपी बंद होने पर गंदे पानी के निस्तारण और रिसाइक्लिंग की पूरी व्यवस्था प्रभावित होती है, जिसका असर सीधे सोसायटी के निवासियों पर पड़ सकता है।

एक महीने बाद भी नहीं मिला जवाब

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार, बिल्डरों को पहले भी नोटिस और निर्देश भेजे गए थे। हालांकि, एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद कई मामलों में संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसी वजह से अब दोबारा नोटिस जारी कर जवाब तलब किया गया है।

क्यों जरूरी है एसटीपी?

हाइराइज सोसायटियों में एसटीपी लगाना और उसे चालू हालत में रखना अनिवार्य होता है। इसका उद्देश्य सीवेज के पानी को ट्रीट कर दोबारा उपयोग योग्य बनाना और पर्यावरण को प्रदूषण से बचाना है।

अगर एसटीपी ठीक से काम नहीं करता, तो न केवल पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन होता है बल्कि भूजल और आसपास के जल स्रोतों के प्रदूषित होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

निवासियों की बढ़ी चिंता

सेक्टर-150 की कई सोसायटियों में पहले भी पानी की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। अब एसटीपी बंद मिलने के बाद निवासियों की चिंता और बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि नियमित निगरानी और सख्त कार्रवाई से ही ऐसी लापरवाही पर रोक लगाई जा सकती है।

फिलहाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने बिल्डरों से जवाब मांगा है। अगर निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई की जा सकती है।

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